द्वाविमौ पुरुषौ लोके न मुद्रण
द्वाविमौ पुरुषौ लोके न भूतौ न भविष्यतः ।
प्रार्थितं यश्च कुरुते यश्च नार्थयते परम् ॥

दो प्रकार के लोग होना मुश्किल है; जो दूसरों की प्रार्थना पूरी करता है, और जो दूसरे के पास मागता नहि ।