त्रिविधा भवति श्रद्धा मुद्रण
त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा ।
सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां श्रुणु ॥

श्रद्धा स्वभावानुसार सात्त्विक, राजसी, और तामसी, ऐसे तीन प्रकार की होती हैं, वह सुन ।