बहवो न विरोध्दव्याः मुद्रण ई-मेल
बहवो न विरोध्दव्याः दुर्जयास्तेऽपि दुर्बलाः ।
स्फुरन्तमपि नागेन्द्रं भक्षयन्ति पिपीलिकाः ॥

अनेक लोगों का विरोध नहि करना चाहिए । वे दुर्बल हो तो भी दुर्जय बनते हैं । फडकते हुए सांप को भी चींटीयाँ खा जाती है ।

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