असहायः पुमानेकः कार्यान्तं मुद्रण ई-मेल
असहायः पुमानेकः कार्यान्तं नाधिगच्छति ।
तुषेणापि विनिर्मुक्तः तण्डुलो न प्ररोहति ॥

इन्सान अकेला हो तब असहाय है, उस के कार्य का अंत नहि होता । 'तुष' से त्यजे गये चावल उगते नहि ।

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