कुठार मालिकां दृष्ट्वा मुद्रण
कुठार मालिकां दृष्ट्वा कम्पिताः सकलाः द्रुमाः ।
वृद्धस्तरुरुवाचेदं स्वजाति र्नैव दृश्यते ॥

कुल्हाडी की हारमाला देखकर सब वृक्ष कंपित हो उठे । (तब) एक वृद्ध वृक्ष ने कहा, (डरना नहि) "इनमें स्वजाति का कोई दिखता नहि ।"