एकस्मिन् अक्षिणि काके मुद्रण ई-मेल
एकस्मिन् अक्षिणि काके यदा विज्ञायते पिपत् ।
ते काकाः मिलिताः सन्तः यतन्ते तन्निवृत्तये ॥

कौए को एक हि आँख होती है । फिर भी जब विपत्ति आती है, तब सब कौए साथ मिलकर उसे दूर करने का प्रयत्न करते हैं ।

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