अन्योन्यैक्यप्रभावेण मुद्रण ई-मेल
अन्योन्यैक्यप्रभावेण पाण्डवानां जयः किल ।
विनष्टाः कौरवाः सर्वे तदभावान्न संशयः ॥

अन्योन्य ऐक्यप्रभाव से पांडवों का जय हुआ, और उसके अभाव से कौरवों का नाश, इसमें संदेह नहि ।

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