ऐक्य
संहतिः श्रेयसी पुंसां मुद्रण ई-मेल
संहतिः श्रेयसी पुंसां स्वकुलैरल्पकैरपि ।
तुषेणापि परित्यक्ता न प्ररोहन्ति तण्डुलाः ॥

स्वयं का कुल छोटा हो फिर भी इन्सान के लिए संप हितकारक है । "तुष" से त्यजे हुए चावल उगते नहि ।

 
अल्पानामपि वस्तूनां मुद्रण ई-मेल
अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका ।
तृणै र्गुणत्वमापन्नै र्बध्यन्ते मत्तदन्तिनः ॥

अल्प वस्तुओं का पुंज भी कार्य निपटाने वाला बन जाता है । तिन्के जब रस्सी बन जाय, तो उससे मत्त हाथी भी बाँधे जाते हैं ।

 
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