राहिणि नलिनीलक्ष्मी दिवसो मुद्रण ई-मेल
राहिणि नलिनीलक्ष्मी दिवसो निदधाति दिनकराप्रभवाम् ।
अनपेक्षितगुणदोषः परोपकारः सतां व्यसनम् ॥

दिन में जिसे अनुराग है वैसे कमल को, दिन सूर्य से पैदा हुई शोभा देता है । अर्थात् परोपकार करना तो सज्जनों का व्यसन-आदत है, उन्हें गुण-दोष की परवा नहीं होती ।

Comments (0)
Only registered users can write comments!
 

[+]
  • Increase font size
  • Default font size
  • Decrease font size
 Type in