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प्रकृति-स्वभावो दुरतिक्रमः मुद्रण ई-मेल

प्रकृति
स्वभावो दुरतिक्रमः ।
स्वभाव बदलना मुश्किल है ।

 
पृथिवी-बह्वाश्र्चर्या हि मेदनी मुद्रण ई-मेल

पृथिवी
बह्वाश्र्चर्या हि मेदनी ।
पृथ्वी अनेक आश्र्चर्यों से भरी हुई है ।

 
पृथिवी-वीरभोग्या वसुन्धरा मुद्रण ई-मेल

पृथिवी
वीरभोग्या वसुन्धरा ।
पृथ्वी का उपभोग वीर पुरुष हि कर सकते है ।

 
पृथिवी-बहुरत्ना वसुन्धरा मुद्रण ई-मेल

पृथिवी
बहुरत्ना वसुन्धरा ।
पृथ्वी काफ़ी रत्नों से भरी हुई है ।

 
पुरुष-अयोग्यः पुरुषः नास्ति मुद्रण ई-मेल

पुरुष 
अयोग्यः पुरुषः नास्ति योजकस्तत्र दुर्लभः ।
कोई भी पुरुष अयोग्य नहीं, पर उसे योग्य काम में जोडनेवाला पुरुष दुर्लभ है ।

 
पिता-पितृदोषेण मूर्खता मुद्रण ई-मेल

पिता 
पितृदोषेण मूर्खता ।
पिता के दोष से हि संतान मूर्ख होती है ।

 
पिता-ऋणकर्ता पिता शत्रुः मुद्रण ई-मेल

पिता
ऋणकर्ता पिता शत्रुः ।
ऋण करनेवाला पिता शत्रु है ।

 
पिता-पितरि प्रीतिमापन्ने मुद्रण ई-मेल

पिता
पितरि प्रीतिमापन्ने प्रीयन्ते सर्वदेवताः ।
पिता प्रसन्न हो तो सब देव प्रसन्न होते हैं ।

 
पिता-पितु र्हि वचनं मुद्रण ई-मेल

पिता
पितु र्हि वचनं कुर्वन् न कश्र्चिन्नाम हीयते ।
पिता के वचन का पालन करनेवाला दीन-हीन नहीं होता ।

 
पिता-पात्रत्वाद् धनमाप्नोति मुद्रण ई-मेल

पिता
पात्रत्वाद् धनमाप्नोति ।
पात्रता होने से इन्सान धन प्राप्त करता है ।

 
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