सूक्तियाँ
भोजन-वपुराख्याति भोजनम् मुद्रण ई-मेल

भोजन
वपुराख्याति भोजनम् ।
मानव कैसा भोजन लेता है उसका ध्यान उसके शरीर पर से आता है ।

 
भोजन-कदन्नता चोष्णतया मुद्रण ई-मेल

भोजन
कदन्नता चोष्णतया विराजते ।
खराब (बुरा) अन्न भी गर्म हो तब अच्छा लगता है ।

 
भृत्य-स्वस्वामिना बलवता मुद्रण ई-मेल

भृत्य 
स्वस्वामिना बलवता भृत्यो भवति गर्वितः ।
जिस भृत्य का स्वामी बलवान है वह भृत्य गर्विष्ट बनता है ।

 
भृत्य-शुचिर्दक्षोऽनुरक्तश्र्च मुद्रण ई-मेल

भृत्य
शुचिर्दक्षोऽनुरक्तश्र्च भृत्यः खलु सुदुर्लभः ।
इमानदार, दक्ष और अनुरागी भृत्य (सेवक) दुर्लभ होते हैं ।

 
भार्या-भार्या मित्रं मुद्रण ई-मेल

भार्या
भार्या मित्रं गृहेषु च ।
गृहस्थ के लिए उसकी पत्नी उसका मित्र है ।

 
भार्या-भार्या दैवकृतः सखा मुद्रण ई-मेल

भार्या 
भार्या दैवकृतः सखा ।
भार्या दैव से किया हुआ साथी है ।

 
भार्या-नास्ति भार्यासमं मुद्रण ई-मेल

भार्या 
नास्ति भार्यासमं किज्चिन्नरस्यार्तस्य भेषजम् ।
आर्त (दुःखी) मानव के लिए भार्या समान कोई ओसड नहीं है ।

 
भार्या-नास्ति भार्यासमो मुद्रण ई-मेल

भार्या 
नास्ति भार्यासमो बन्धु नास्ति भार्यासमा गतिः ।
भार्या समान कोई बन्धु नहीं है, भार्या समान कोई गति नहीं है ।

 
भाग्य-चक्रारपंक्तिरिव मुद्रण ई-मेल

भाग्य 
चक्रारपंक्तिरिव गच्छति भाग्यपंक्तिः ।
चक्र के आरे की तरह भाग्यकी पंक्ति उपर-नीचे हो सकती है ।

 
भाग्य-यद् धात्रा लिखितं मुद्रण ई-मेल

भाग्य 
यद् धात्रा लिखितं ललाटफ़लके तन्मार्जितुं कः क्षमः ।
विधाता ने जो ललाट पर लिखा है उसे कौन मिथ्या  कर सकता है ?

 
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