सूक्तियाँ
माता-न मातुः परदैवतम् मुद्रण ई-मेल

माता
न मातुः परदैवतम् ।
माँ से बढकर कोई देव नहीं है ।

 
माता-कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि मुद्रण ई-मेल

माता
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ।
पुत्र कुपुत्र होता है लेकिन माता कभी कुमाता नहीं होती ।

 
माता-गुरुणामेव सर्वेषां मुद्रण ई-मेल

माता
गुरुणामेव सर्वेषां माता गुरुतरा स्मृता ।
सब गुरु में माता को सर्वश्रेष्ठ गुरु माना गया है ।

 
मन-मनसि व्याकुले मुद्रण ई-मेल

मन
मनसि व्याकुले चक्षुः पश्यन्नपि न पश्यति ।
मन  व्याकुल हो तब आँख देखने के बावजूद देख नहीं सकती ।

 
मन-मनः शीघ्रतरं मुद्रण ई-मेल

मन
मनः शीघ्रतरं बातात् ।
मन वायु से भी अधिक गतिशील है ।

 
मन-मन एव मनुष्याणां मुद्रण ई-मेल

मन
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः ।
मन हि मानव के बंधन और मोक्ष का कारण है ।

 
भोजन-भोजनस्यादरो रसः मुद्रण ई-मेल

भोजन
भोजनस्यादरो रसः ।
भोजन का रस “आदर” है ।

 
भोजन-विना गोरसं को मुद्रण ई-मेल

भोजन
विना गोरसं को रसो भोजनानाम् ।
बिना गोरस भोजन का स्वाद कहाँ ?

 
भोजन-कुभोज्येन दिनं मुद्रण ई-मेल

भोजन
कुभोज्येन दिनं नष्टम् ।
बुरे भोजन से पूरा दिन बिगडता है ।

 
भोजन-अजीर्णे भोजनं विषम् मुद्रण ई-मेल

भोजन
अजीर्णे भोजनं विषम् ।
अपाचन हुआ हो तब भोजन विष समान है ।

 
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