सूक्तियाँ
आचार्यवान् पुरुषो मुद्रण ई-मेल
आचार्यवान् पुरुषो वेद ।
जिसका आचार्य श्रेष्ठ है वह मानव हि ज्ञान प्राप्त करता है ।

 
आचार्यः कस्माद् मुद्रण ई-मेल
आचार्यः कस्माद् , आचारं ग्राह्यति ।
आचार्य को आचार्य किस लिए कहा जाता है ? क्यों कि वे अपने आचरण द्वारा आचार का शिक्षण देते हैं ।


 
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