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राजा-राजा कालस्य कारणम् मुद्रण ई-मेल

राजा 
राजा कालस्य कारणम् ।
राजा काल का कारण है ।

 
योग्यता-श्रध्दा ज्ञानं ददाति,, मुद्रण ई-मेल

योग्यता
श्रध्दा ज्ञानं ददाति ।
नम्रता मानं ददाति ।
(किन्तु) योग्यता स्थानं ददाति ।
श्रद्धा ज्ञान देती है, नम्रता मान देती है और योग्यता स्थान देती है ।

 
याचक-तृणाल्लघुतरं तूलं मुद्रण ई-मेल

याचक
तृणाल्लघुतरं तूलं तूलादपि च याचकः ।
तिन्के से रुई हलका है, और याचक रुई से भी हलका है ।

 
याचक-लुब्धानां याचको रिपुः मुद्रण ई-मेल

याचक
लुब्धानां याचको रिपुः ।
लोभी मानव को याचक शत्रु जैसा लगता है ।

 
याचक-याचको याचकं दृष्टा मुद्रण ई-मेल

याचक
याचको याचकं दृष्टा श्र्वानवद् घुर्घुरायते ।
याचक को देखकर याचक, कुत्ते की तरह घुर्राता है ।

 
यश-यशोवधः प्राणवधात् मुद्रण ई-मेल

यश  
यशोवधः प्राणवधात् गरीयान् ।
यशोवध प्राणवध से भी बडा है ।

 
यश-यशोधनानां हि मुद्रण ई-मेल

यश
यशोधनानां हि यशो गरीयः ।
यशरूपी धनवाले को यश हि सबसे महान वस्तु है ।

 
मौन-वरं मौनं कार्यं मुद्रण ई-मेल

मौन
वरं मौनं कार्यं न च वचनमुक्तं यदनृतम् ।
असत्य वचन बोलने से मौन धारण करना अच्छा है ।

 
मौन-मौनिनः कलहो नास्ति मुद्रण ई-मेल

मौन
मौनिनः कलहो नास्ति ।
मौनी मानव का किसी से भी कलह नहीं होता ।

 
मौन-मौनं सर्वार्थसाधनम् मुद्रण ई-मेल

मौन
मौनं सर्वार्थसाधनम् ।
मौन यह सर्व कार्य का साधक है ।

 
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