सूर्यनमस्कार:तेजपूर्ण जीवन की उपासना मुद्रण

स्वातंत्र्य संग्राम के आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के अभिनव प्रयोगों में सदा व्यस्त श्री विनोबा भावे एक बार बीमार पडे । शरीर की जीर्णता देखकर डॉक्टरों ने सक्रिय आंदोलन से आराम लेने की सलाह दी । विनोबाजी को भी लगा कि आत्म-निरीक्षण करने के लिए यह अवसर अच्छा है । रोजबरोज के जीवन में दूसरों के गुण-दोष ही ज़ादा दिखाई पडते हैं ! इस लिए गांधीजी की अनुमति लेकर वे कुछ अरसे तक आश्रम से बाहर चले गये ।

कुछ एक समय बाद वे वापस लौटे तब बापु ने पूछा, “अब तबियत कैसी है ? कौन से हिल स्टेशन पर ठहर आये ?” विनोबाजी ने कहा, “बापू ! हम थोडे अंग्रेज हैं जो शरीर का लालन पालन करने हिल स्टेशन की जरुरत पडे ! मैं तो गाँव चला गया था । बस दो-चार दिन आराम किया और फिर ग्राम्य शैली से जीने लगा ! रोज सुबह सूर्यनमस्कार के आसन करता था और खेत में हल चलाता था । कुछ दिनों में तबियत अपने आप ठीक हो गयी !”

जैसे विनोबाजी के जीवन में सूर्यनमस्कार का महत्त्व दिखायी देता है, वैसे ही तिलक महाराज और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे लोगों के जीवन में भी उसका विशेष स्थान रहा है । समर्थ स्वामी रामदास ने जन सामान्य में तेजोपासना और बलोपासना स्थिर करने के लिए महाराष्ट्र के गाँव गाँव में सूर्यनमस्कार का प्रयोग स्थिर किया था, जिसके प्रतिघोष स्वरुप महाराज शिवाजी को वीर-धीर मावला सैनिक प्राप्त हुए और मुगल सल्तन को परास्त होना पडा ।

पर जिमनेशीयम और आधुनिक उपकरणों के काल में, सूर्यनमस्कार जैसी सगुणोपासना की आवश्यकता है ? उसके आसनों में शारीरिक तंदुरुस्ती के अलावा और कोई शास्त्रीय बातें हैं ?
आइए इस Presentation के ज़रीये सामान्य लगनेवाले योगासनों में मानवी-मन का कितना सूक्ष्म विचार किया गया है यह देखें । PDF पर क्लिक करें..