आजका सुविचार

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चिन्ताज्वरो मनुष्याणां क्षुधां निद्रां बलं हरेत् ।
रूपमुत्साहबुध्दिं श्रीं जीवितं च न संशयः ॥

The fever of worry snatches away hunger, sleep, strength, beauty, enthusiasm, mind, wealth and life itself - there is no doubt.

"चिंता" स्वरुप ज्वर (बुखार) भूख, नींद, बल, सौंदर्य, उत्साह, बुद्धि, समृद्धि और स्वयं जीवन को भी हर लेता है ।

 
मत्तः प्रमत्तः उन्मत्तः श्रान्तः क्रुद्धः बुभुक्षितः ।
त्वरमाणश्च लुब्धश्च भीतः कामी च ते दश ॥

मद्य पीया हुआ, असावध, उन्मत्त, थका हुआ, क्रोधी, डरपोक, भूखा, त्वरित, लोभी, और विषयलंपट – ये दस धर्म को नहीं जानते (अर्थात् उनसे संबंध नहीं रखना चाहिए) ।

 
आयु र्वित्तं गृहच्छिद्रं मन्त्रमौषध मैथुने ।
दानं मानापमानौ च नव गोप्यानि कारयेत् ॥

आयुष्य, वित्त, गृहछिद्र, मंत्र, औषध, मैथुन, दान, मान, और अपमान – ये नौ बातें गुप्त रखनी चाहिए ।

 
उद्योगः कलहः कण्डू र्मद्यं द्यूतं च मैथुनम् ।
आहारो व्यसनं निद्रा सेवनात् विवर्धते ॥

उद्योग, कलह, खुजली, मद्य, मैथुन, आहार, व्यसन, द्यूत, और निद्रा, सेवन करने से बढते हैं ।

 
पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यामुरसा शिरस्तथा ।
मनसा वचसा दृष्टया प्रणामोऽष्टाङ्गमुच्यते ॥

हाथ, पैर, घूटने, छाती, मस्तक, मन, वचन, और दृष्टि इन आठ अंगों से किया हुआ प्रणाम अष्टांग नमस्कार कहा जाता है ।

 
आज्ञापालन मुद्रण ई-मेल

Aagnapalanहिमालय की गोद में एक ऋषि का सुंदर आश्रम था । उस आश्रम में ऋषि के साथ अनेक शिष्य भी रहते थे । वे आश्रम के दैनिक नित्यक्रम में रहकर ऋषि के मार्गदर्शन से जीवन की शिक्षा लेते थे॑ । आश्रम का सारा काम शिष्य ही संभालते थे । साथ मिलकर रहना और काम करना यही अपने आप में एक बडा़ शिक्षण था । इसके अलावा ऋषि के साथ बैठकर जीवन के अलग अलग पाठ सिखने का अवसर भी मिलता ।

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चिन्ताज्वरो मनुष्याणां मुद्रण ई-मेल

चिन्ताज्वरो मनुष्याणां क्षुधां निद्रां बलं हरेत् ।
रूपमुत्साहबुध्दिं श्रीं जीवितं च न संशयः ॥

The fever of worry snatches away hunger, sleep, strength, beauty, enthusiasm, mind, wealth and life itself - there is no doubt.

"चिंता" स्वरुप ज्वर (बुखार) भूख, नींद, बल, सौंदर्य, उत्साह, बुद्धि, समृद्धि और स्वयं जीवन को भी हर लेता है ।

 
नाभिषेको न संस्कारः मुद्रण ई-मेल

नाभिषेको न संस्कारः सिंहस्य क्रियते वने ।
विक्रमार्जितसत्त्वस्य स्वयमेव मृगेंद्रता ॥

There is no official coronation (RaajyaBhishek) ceremony held or any samskar performed to declare that Lion is the king of jungle. He becomes king by his own attributes and heroism ('Parakram').

सिंह को जंगल का राजा नियुक्त करने के लिए न तो कोई अभिषेक किया जाता है, न कोई संस्कार । अपने गुण और पराक्रम से वह खुद ही मृगेंद्रपद प्राप्त करता है ।

 
Character Alphabet मुद्रण ई-मेल

Great personalities form the cloth that engulfs the human mind in its search for an ideal. From early childhood days, we idolize people around us and try to imitate their ways of behaviour and action. This imitation goes a long way, along with our environment, in shaping our character, way of thinking and actions. Just like a child needs someone to hold its hand when it takes a first step, so do we in our quest for perfection.

In the past we have taught our child to identify an alphabet with objects that are in routine use, e.g. A is associated with Apple, B is associated with Ball, and so on. We thought instead let’s teach our children to associate the alphabets with great characters from our immediate past and our glorious ancient history.

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सूर्यनमस्कार:तेजपूर्ण जीवन की उपासना मुद्रण ई-मेल

स्वातंत्र्य संग्राम के आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के अभिनव प्रयोगों में सदा व्यस्त श्री विनोबा भावे एक बार बीमार पडे । शरीर की जीर्णता देखकर डॉक्टरों ने सक्रिय आंदोलन से आराम लेने की सलाह दी । विनोबाजी को भी लगा कि आत्म-निरीक्षण करने के लिए यह अवसर अच्छा है । रोजबरोज के जीवन में दूसरों के गुण-दोष ही ज़ादा दिखाई पडते हैं ! इस लिए गांधीजी की अनुमति लेकर वे कुछ अरसे तक आश्रम से बाहर चले गये ।

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