कर्म
यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण | यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण |
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| सुभाषित - कर्म | ||||||
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यत्तु कामेप्सुना कर्म साहङ्कारेण वा पुनः । क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम् ॥ जो कर्म बहुत परिश्रम उठाकर किया जाता है, और उपर से भोगेच्छा से या अहंकार से किया जाता है, वह कर्म राजसी कहा गया है ।
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