शील
बान्धवाः सुह्रदः सर्वे निःशीलस्य | बान्धवाः सुह्रदः सर्वे निःशीलस्य |
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| सुभाषित - शील | ||||||
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बान्धवाः सुह्रदः सर्वे निःशीलस्य पराङ्मुखाः । संबंधी और सभी मित्र, बगैर शील के इन्सान से दूर चले जाते हैं । जब कि शीलवान मनुष्य को दूराराध्य शत्रु भी सन्मुख आ जाते हैं ।
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