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यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं | यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं |
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यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत् । उच्छिष्टमपि चामेध्यं भोजनं तामसप्रियम् ॥ जो आहार आधा कच्चा-पक्का, सूख गये रसवाला, स्वभाव से दुर्गंधी, बासी और जूठा हो, तथा जो अपिवत्र हो, वैसा आहार तामसी इन्सान को प्रिय होता है ।
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