अ११ विश्वरुपदर्शनयोग
भवाप्ययौ हि भूतानां | भवाप्ययौ हि भूतानां |
|
|
| श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय ११ | ||||||
|
भवाप्ययौ हि भूतानां श्रुतौ विस्तरशो मया। त्वत्तः कमलपत्राक्ष महात्म्यमपि चाव्ययम् ॥ २ ॥क्योंकि हे कमलनेत्र मैंने आपसे भूतोंकी उत्पत्ति और प्रलय विस्तार पूर्वक सुने है तथा अविनाशी महिमा भी सुनी है ।
Only registered users can write comments!
Powered by !JoomlaComment 3.26
3.26 Copyright (C) 2008 Compojoom.com / Copyright (C) 2007 Alain Georgette / Copyright (C) 2006 Frantisek Hliva. All rights reserved." |
||||||
| < पिछला | अगला > |
|---|





Powered
By PramukhLib