आधुनिक विज्ञान
विश्व या अजूबा ! | विश्व या अजूबा ! |
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सांप्रत समय की प्रत्यक्षवादी और अनुभवमूलक विचारधारा ने केवल इंद्रियजन्य ज्ञान को ही सर्वोत्तम बना दिया है । अर्थात् बाह्य चक्षु से दिखनेवाले अजूबों को या मानव निर्मित अजूबें जैसे कि ताजमहल, या चीनी दिवार को ही हम अजूबें समजते है । पर थोडा सूक्ष्मता से सोचें, अंतःचक्षु का इस्तमाल करें तो अणुमात्र से लेकर खगोलीय स्तर तक, विश्वभर में एक गहरी रचना दिखाई देती है । समस्त सृष्टि ही अजूबा है !
सृष्टि के सर्जन मात्र में अभिव्यक्त होनेवाली चेतना, सुव्यवस्था और विस्मितता “सर्जित” है, “उद्भेदित” (evolved) है, या “अकस्मात” है - इस विषय में मतैक्य भले न हो, पर विश्व अजूबा है इस विषय में कोई मतभेद नहीं । सर्जन या अकस्मात का निर्णय यूँ भी बुद्धि पर कम और जीवनध्येय या उपासना के स्तर पर ज़ादा आधारित है ।
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