Google Sitemap Generator

आजका सुविचार

There are no perfect ment in the world, only perfect intentions.

नालस्य प्रसरो जलेष्वपि कृतवासस्य कोशे रुचि
र्दण्डे कर्कशता मुखेऽतिमृदुता मित्रे महान्प्रश्रयः ।
आमूलं गुणसंग्रहव्यसनिता द्वेषश्च दोषाकरे
यस्यैषा स्थितिरम्बुजस्य वसति युक्तैव तत्र श्रियः ॥

जिसकी नाल जल में होने पर भी कोसों दूर जिसकी सुवास फैली है, जिसका दण्ड कठिन है, मुख अति कोमल है, मित्रों को जो आश्रय देता है, पहले से हि जिसे गुणसंग्रह का व्यसन है, और दोष के प्रति जिसे द्वेष है; ऐसे पानी में जन्मे हुए कमल में लक्ष्मी का वास है, वह युक्त है ।
Details ...

मन्त्रबीजमिदं गुप्तं रक्षणीयं यथा तथा ।
मनागपि न भिद्येते तद्बिन्नं न प्ररोहति ॥

Details ...

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहवः स तु जीवति ।
काकोऽपि किं न कुरुते चंच्वा स्वोदरपूरणम् ॥

जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है,  अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता ?

Details ...

यथा काष्ठमयो हस्ती यथा चर्ममयो मृगः ।
तथा वेदं विना विप्रः त्रयस्ते नामधारकाः ॥

Details ...

वाग्वैश्वरी शब्दझरी शास्त्रव्याख्यानकौशलम् ।
वैदुष्यं विदुषां तद्वत् भुङ्क्तये न तु मुक्तये ॥

Details ...

कृतार्थः स्वामिनं द्वेष्टि कृतदारस्तु मातरम् ।
जातापत्या पतिं द्वेष्टि गतरोगाश्चिकित्सकम् ॥ 

Details ...

शौचानां परमं शौचं गुणानां परमो गुणः ।
प्रभावो महिमा धाम शीलमेकं जगत्त्रये ॥

Details ...

यस्मिन् देशे न सन्मानो न प्रीति र्न च बान्धवाः ।
न च विद्यागमः कश्चित् न तत्र दिवसं वसेत् ॥

Details ...

पुनः प्रभातं पुनरेव शर्वरी
पुनः शशांकः पुनरुद्यते रविः ।
कालस्य किं गच्छति याति यौवनं
तथापि लोकः कथितं न बुध्यते ॥

फिर से प्रभात, फिर से रात्रि, फिर से चंद्र, और फिर से सूरज का उगना ! काल का क्या जाता है ? कुछ नहीं; यह तो यौवन जाता है, (पर) लोग कहाँ समज़ते हैं ?

Details ...

मृगमदकर्पूरागरुचन्दनगन्धाधिवासितो लशुनः ।
न त्यजति गंधमशुभं प्रकृतिमिव सहोत्थितां नीचः ॥

कस्तूरी
, कपूर, अगरु और सुवास से सुवासित किया हुआ लसून अपनी दुर्गंध नहीं छोडता । वैसे हि दुष्ट अपनी जन्मजात नीच व्रृत्तिओं का त्याग नहीं करता ।

 

Details ...

मुख्य पृष्ठ
सूर्यनमस्कार:तेजपूर्ण जीवन की उपासना छापें ई-मेल
    Image

स्वातंत्र्य संग्राम के आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के अभिनव प्रयोगों में सदा व्यस्त श्री विनोबा भावे एक बार बीमार पडे । शरीर की जीर्णता देखकर डॉक्टरों ने सक्रिय आंदोलन से आराम लेने की सलाह दी । विनोबाजी को भी लगा कि आत्म-निरीक्षण करने के लिए यह अवसर अच्छा है । रोजबरोज के जीवन में दूसरों के गुण-दोष ही ज़ादा दिखाई पडते हैं ! इस लिए गांधीजी की अनुमति लेकर वे कुछ अरसे तक आश्रम से बाहर चले गये ।

कुछ एक समय बाद वे वापस लौटे तब बापु ने पूछा, अब तबियत कैसी है ? कौन से हिल स्टेशन पर ठहर आये ? विनोबाजी ने कहा, बापू ! हम थोडे अंग्रेज हैं जो शरीर का लालन पालन करने हिल स्टेशन की जरुरत पडे ! मैं तो गाँव चला गया था । बस दो-चार दिन आराम किया और फिर ग्राम्य शैली से जीने लगा ! रोज सुबह सूर्यनमस्कार के आसन करता था और खेत में हल चलाता था । कुछ दिनों में तबियत अपने आप ठीक हो गयी !” 

जैसे विनोबाजी के जीवन में सूर्यनमस्कार का महत्त्व दिखायी देता है, वैसे ही तिलक महाराज और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे लोगों के जीवन में भी उसका विशेष स्थान रहा है । समर्थ स्वामी रामदास ने जन सामान्य में तेजोपासना और बलोपासना स्थिर करने के लिए महाराष्ट्र के गाँव गाँव में सूर्यनमस्कार का प्रयोग स्थिर किया था, जिसके प्रतिघोष स्वरुप महाराज शिवाजी को वीर-धीर मावला सैनिक प्राप्त हुए और मुगल सल्तन को परास्त होना पडा ।

पर जिमनेशीयम और आधुनिक उपकरणों के काल में, सूर्यनमस्कार जैसी सगुणोपासना की आवश्यकता है ? उसके आसनों में शारीरिक तंदुरुस्ती के अलावा और कोई शास्त्रीय बातें हैं ? Image आइए इस Presentation के ज़रीये सामान्य लगनेवाले योगासनों में मानवी-मन का कितना सूक्ष्म विचार किया गया है यह देखें । PDF पर क्लिक करें..

 

Comments
Search
Only registered users can write comments!

3.26 Copyright (C) 2008 Compojoom.com / Copyright (C) 2007 Alain Georgette / Copyright (C) 2006 Frantisek Hliva. All rights reserved."

 
< पिछला

[+]
  • Increase font size
  • Decrease font size
  • Default font size
 Type in