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आजका सुविचार

Give a man a fish and you feed him for a day. Teach a man to fish and you feed him for a lifetime.

एकस्मिन् अक्षिणि काके यदा विज्ञायते पिपत् ।
ते काकाः मिलिताः सन्तः यतन्ते तन्निवृत्तये ॥

कौए को एक हि आँख होती है । फिर भी जब विपत्ति आती है, तब सब कौए साथ मिलकर उसे दूर करने का प्रयत्न करते हैं ।

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यथा मधु समादत्ते रक्षन् पुष्पाणि षट्पदः ।
तद्वदर्थान् मनुष्येभ्यः आदद्यात् अविहिंसया ॥

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प्रथमे नार्जिता विद्या द्वितीये नार्जितं धनम् ।
तृतीये नार्जितं पुण्यं चतुर्थे किं करिष्यति ॥

जीवन के प्रथम (आश्रम) में जिसने विद्या न पायी, दूसरे में धन नहि पाया, तीसरे में पुण्य नहि पाया, वह चौथे में क्या करेगा ?

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पात्रेभ्यः दीयते नित्यमनपेक्ष्य प्रयोजनम् ।
केवलं त्यागबुध्दया यद् धर्मदानं तदुच्यते ॥

किसी प्रकार के प्रयोजन बिना, जो केवल त्यागबुद्धि से दिया जाता है, वही धर्मदान कहलाता है ।

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बहवो न विरोध्दव्याः दुर्जयास्तेऽपि दुर्बलाः ।
स्फुरन्तमपि नागेन्द्रं भक्षयन्ति पिपीलिकाः ॥

अनेक लोगों का विरोध नहि करना चाहिए । वे दुर्बल हो तो भी दुर्जय बनते हैं । फडकते हुए सांप को भी चींटीयाँ खा जाती है ।

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यथा चतुर्भिः कनकं परीक्ष्यते
निघर्षणच्छेदनतापताडनैः ।
तथा चतुर्भिः पुरुषः परीक्ष्यते
श्रुतेन शीलेन गुणेन कर्मणा ॥

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शिक्षा कल्पो व्याकरणं निरुक्तं छन्दसामिति ।
ज्योतिषामयनं चैव षडंगो वेद उच्यते ॥

शिक्षा (उच्चार शास्त्र), कल्प (
धर्मसूत्र, गृह्यसूत्र इ.), व्याकरण ( भाषा शास्त्र), निरुक्त (शब्द/ व्युत्पत्ति शास्त्र), छन्द (वृत्त), और ज्योतिष (समय/खगोल शास्त्र) ये छे वेदांग कहे गये हैं ।

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त्याज्यं न धैर्यं विधुरेऽपि काले
धैर्यात् कदाचिद्गतिमाप्नुयात् सः ।
यथा समुद्रेऽपि च पोतभङ्गे
तां यात्रिको वाञ्छति तर्तुमेव ॥

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स जीवति गुणा यस्य धर्मो यस्य जीवति ।
गुणधर्मविहीनो यो निष्फलं तस्य जीवितम् ॥

जो गुणवान है, धार्मिक है वही जीते हैं (या "जीये" कहे जाते हैं) । जो गुण और धर्म से रहित है उसका जीवन निष्फल है ।

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पठतो नास्ति मूर्खत्वं अपनो नास्ति पातकम् ।
मौनिनः कलहो नास्ति न भयं चास्ति जाग्रतः ॥

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किशोर वय - बिगाडना या सराहना छापें ई-मेल
Image किशोरावस्था युवानी के अरुणोदय समान है, जो बचपन की नादानी और युवानी के जोश का संधि काल है । इस नाजुक अवस्था में हमें ऐसे महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं जो हमारी समस्त आयु को प्रभावित करते हैं । केवल निर्णय ही नहीं, बल्कि इस उम्र में डाली गयी आदतें भी लगभग उम्रभर हमारे साथ रहती है !

किशोरावस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है - कारकिर्दी की दिशा निश्चित करना, जो कि बहुधा वित्त आधारित या गतानुगतिक त्वरा से तय कर ली जाती है । परंतु ध्येय की समज और उसके लिए अवकाश निर्माण किये बिना केवल महत्त्वाकांक्षा पर खडी कारकिर्दी श्रेयकर नहीं बन सकती ।

Image इस Presentation में कारकिर्दी के मार्गदर्शन के अतिरिक्त हमारी मनोभूमिका तैयार करने पर जोर दिया गया है जिस से हम काबेल और नेक इन्सान बन सकें । PDF पर क्लिक करें...  

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