भक्ति
श्रवणं कीर्तनं ध्यानं | श्रवणं कीर्तनं ध्यानं |
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| सुभाषित - भक्ति | ||||||
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श्रवणं कीर्तनं ध्यानं हरेरकर्मणः । भगवान की लीलाएँ अद्भुत हैं । उनके जन्म, कर्म, और गुण दिव्य हैं । उन्हीं का श्रवण, कीर्तन, और ध्यान करना चाहिए । सब भगवान के लिए करना सीखना चाहिए ।
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