किशोर वय - बिगाडना या सराहना मुद्रण ई-मेल
किशोरावस्था युवानी के अरुणोदय समान है, जो बचपन की नादानी और युवानी के जोश का संधि काल है । इस नाजुक अवस्था में हमें ऐसे महत्त्वपूर्ण निर्णय लेने होते हैं जो हमारी समस्त आयु को प्रभावित करते हैं । केवल निर्णय ही नहीं, बल्कि इस उम्र में डाली गयी आदतें भी लगभग उम्रभर हमारे साथ रहती है !

किशोरावस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है - कारकिर्दी की दिशा निश्चित करना, जो कि बहुधा वित्त आधारित या गतानुगतिक त्वरा से तय कर ली जाती है । परंतु ध्येय की समज और उसके लिए अवकाश निर्माण किये बिना केवल महत्त्वाकांक्षा पर खडी कारकिर्दी श्रेयकर नहीं बन सकती ।

इस Presentation में कारकिर्दी के मार्गदर्शन के अतिरिक्त हमारी मनोभूमिका तैयार करने पर जोर दिया गया है जिस से हम काबेल और नेक इन्सान बन सकें । PDF पर क्लिक करें...

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