धर्म-तत्त्व
सूर्यनमस्कार:तेजपूर्ण जीवन की उपासना मुद्रण ई-मेल

स्वातंत्र्य संग्राम के आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के अभिनव प्रयोगों में सदा व्यस्त श्री विनोबा भावे एक बार बीमार पडे । शरीर की जीर्णता देखकर डॉक्टरों ने सक्रिय आंदोलन से आराम लेने की सलाह दी । विनोबाजी को भी लगा कि आत्म-निरीक्षण करने के लिए यह अवसर अच्छा है । रोजबरोज के जीवन में दूसरों के गुण-दोष ही ज़ादा दिखाई पडते हैं ! इस लिए गांधीजी की अनुमति लेकर वे कुछ अरसे तक आश्रम से बाहर चले गये ।

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आर्यावर्त: यथा विचार तथा आचार मुद्रण ई-मेल

वैदिकधर्म विचार (भा. 3)

अचिनोति च शास्त्रार्थं आचारे स्थापयत्यति ।
स्वयमप्याचरेदस्तु स आचार्यः इति स्मृतः ॥

जो स्वयं सभी शास्त्रों का अर्थ जानता है, दूसरों के द्वारा ऐसा आचार स्थापित हो इसलिए अहर्निश प्रयत्न करता है; और ऐसा आचार स्वयं अपने आचरण में लाता है, उन्हें आचार्य कहते है ।


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वैदिक संपदा, विश्व संपदा मुद्रण ई-मेल

वैदिकधर्म विचार (भा. २)

आज शनिचर है । कॉलेज में अंतिम दो लेक्चर्स कॅन्सल हुए, तो प्रतीक मिहिर को अपने घर खाने पर ले गया । घर पहुँचकर दोनों ने रसोई में हाथ बँटाया, क्यों कि मिहिर के आने से माँ को अपना रसोई कार्यक्रम बदलना पडा था । दोनों ने मिलकर खीर पकायी और फिर खाना खाकर दिवानघर में बातें करने बैठ गये ।

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विश्व को क्या देंगे ? केवल हिंदुत्त्व ? मुद्रण ई-मेल

वैदिकधर्म विचार (भा. १)


मार्च का समय था । दसवीं कक्षा के इम्तेहान सर पे आ रहे थे । सतीश उसके मित्रों के साथ बडे इत्मनान से उसकी तैयारीयों में लगा हुआ था । एकाएक शहर का व्यवहार ध्वस्त हो गया । किसी कट्टर मजहबी नेता की धरपकड से दंगे फसाद सुरु हो गये थे । बच्चों का घर से आना-जाना सुरक्षित नहीं था । दोस्तों का मिलना बंद हुआ, साथ में होनेवाली पढाई भी रुक गई ।

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