स्वातंत्र्य संग्राम के आंदोलन और राष्ट्र निर्माण के अभिनव प्रयोगों में सदा व्यस्त श्री विनोबा भावे एक बार बीमार पडे । शरीर की जीर्णता देखकर डॉक्टरों ने सक्रिय आंदोलन से आराम लेने की सलाह दी । विनोबाजी को भी लगा कि आत्म-निरीक्षण करने के लिए यह अवसर अच्छा है । रोजबरोज के जीवन में दूसरों के गुण-दोष ही ज़ादा दिखाई पडते हैं ! इस लिए गांधीजी की अनुमति लेकर वे कुछ अरसे तक आश्रम से बाहर चले गये ।
अचिनोति च शास्त्रार्थं आचारे स्थापयत्यति । स्वयमप्याचरेदस्तु स आचार्यः इति स्मृतः ॥
जोस्वयं सभी शास्त्रों का अर्थ जानता है, दूसरों के द्वारा ऐसा आचार स्थापितहो इसलिए अहर्निश प्रयत्न करता है; और ऐसा आचार स्वयं अपने आचरण में लाताहै, उन्हें आचार्य कहते है ।
आज शनिचर है । कॉलेज में अंतिम दो लेक्चर्स कॅन्सल हुए, तो प्रतीक मिहिर को अपने घर खाने पर ले गया । घर पहुँचकर दोनों ने रसोई में हाथ बँटाया, क्यों कि मिहिर के आने से माँ को अपना रसोई कार्यक्रम बदलना पडा था । दोनों ने मिलकर खीर पकायी और फिर खाना खाकर दिवानघर में बातें करने बैठ गये ।
मार्च का समय था । दसवीं कक्षा के इम्तेहान सर पे आ रहे थे । सतीश उसके मित्रों के साथ बडे इत्मनान से उसकी तैयारीयों में लगा हुआ था । एकाएक शहर का व्यवहार ध्वस्त हो गया । किसी कट्टर मजहबी नेता की धरपकड से दंगे फसाद सुरु हो गये थे । बच्चों का घर से आना-जाना सुरक्षित नहीं था । दोस्तों का मिलना बंद हुआ, साथ में होनेवाली पढाई भी रुक गई ।
Select
Indian script from the list and type with 'The way you speak, the way you type'
rule on this page. Refer to following image for details. Press F12 to toggle
between Indic script and English. Powered
By PramukhLib