“नाम में क्या रखा है !” यह वाक्य कीर्तिविषयक हो तब तो ठीक है, पर वैयक्तिक नामाभिधान के अनुसंधान में अगर हो, तो उसे ज्यादा अर्थ नहीं, क्यों कि नाम तो potential energy जितना शक्तिशाली होता है । पर विशेष विचार किये बगैर यह बात सहसा ध्यान में नहीं अाती ।
अाज के Digital Age में इन्सान की identity एक से अनेक होती जा रही है । जन्म के साथ मिले हुए नाम से शुरू होनेवाली identity, credit cards या smart cards की digital identity में, अथवा वेब साइट्स के usernames में उलज जाती है । बचपन में खिलौनों से खेलनेवाला बालक, बडा होने के बाद भी केवल खेलते ही रहता है; यह है कि उसके खिलौने थोडे sophisticated हो जाते हैं जिन्हें हम gadgets (इलेक्ट्रीक उपकरण) कहते हैं ।
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