अपृष्टस्तु नरः किंचिद्यो मुद्रण ई-मेल
अपृष्टस्तु नरः किंचिद्यो ब्रूते राजसंसदि ।
न केवलमसंमानं लभते च विडम्बनम् ॥

राजसभा में बिना पूछे हि अपना अभिप्राय व्यक्त करनेवाले लोग केवल अपमानित हि नहीं पर उपहास के पात्र भी होते हैं ।

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