नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं पश्य मुद्रण ई-मेल
नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं पश्य गत्वा वनस्थलीम् ।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पंगुवत् ॥

दुनिया में अत्यंत सरल न होना । जंगलमें जाकर देखो, सरल वृक्ष (घर बनानेके लिए) काटा जाता है, लेकिन छोटे वृक्ष अपंग मानव की तरह अपनी जगह पर खडे रहते है (काटे नहीं जाते) ।

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