कौर्मं संकोचमास्थाय मुद्रण
कौर्मं संकोचमास्थाय प्रहारानपि मर्षयेत् ।
प्राप्ते काले च मतिमानुत्तिष्ठेत् कृष्णसर्पवत् ॥

कछुए की तरह अपने गात्र संकुचित करके प्रहारभी सहन करना, किन्तु बिध्दिमान मनुष्य ने समय आने पर साँप की तरह डर दिखाना चाहिए ।