मन्त्रबीजमिदं गुप्तं मुद्रण
मन्त्रबीजमिदं गुप्तं रक्षणीयं यथा तथा ।
मनागपि न भिद्येते तद्बिन्नं न प्ररोहति ॥

मंत्रका मूल गुप्त रखनेकी चेष्टा करनी चाहिए । क्योंकि जो मूल बाहर निकले तो बीज उगेगा नहीं (याने कि मंत्रणा विफल हो जायेगी) !