राजधर्म
माता यदि विषं दधात् मुद्रण ई-मेल
माता यदि विषं दधात् विक्रीणाति पिता सुतम् ।
राजा हरति सर्वस्यं तत्र का परिवेदना ॥

यदि माँ (स्वयं) ज़हर दे, पिता बालक को बेचे, और राजा (खुद) सर्वस्व हरण कर ले, तो दुःख किसे कहना ?

 
अप्रमत्तश्च यो राजा सर्वज्ञो मुद्रण ई-मेल
अप्रमत्तश्च यो राजा सर्वज्ञो विजितेन्द्रियः ।
कृतज्ञो धर्मशीलश्च स राजा तिष्ठते चिरम् ॥

जो राजा अप्रमत्त, सर्वज्ञ, जितेन्द्रिय, कृतज्ञी, और धार्मिक है, वह लंबे अरसे तक टिकता है ।

 
असत्प्रलापः पारुष्यं मुद्रण ई-मेल
असत्प्रलापः पारुष्यं पैशुन्यमनृतं तथा ।
चत्वारि वाचा राजेन्द्र न जल्पेन्नानु चिन्तयेत् ॥

असत्, प्रलाप, कठोरता, दृष्टता, और अनृत – ये चार वाणी से न तो उच्चारने चाहिए और न उनका चिंतन करना चाहिए ।

 
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