कोऽर्थः पुत्रेण जातेन यो मुद्रण
कोऽर्थः पुत्रेण जातेन यो न विद्वान न धार्मिकः ।
काणेन चक्षुषा किं वा चक्षुःपीडैव केवलम् ॥

जो विद्वान और धार्मिक नहीं ऐसा पुत्र जनने से क्या लाभ ? एक आँख का क्या उपयोग ? वह तो केवल पीडा ही देती है !