कर्शयन्तः शरीरस्थं मुद्रण ई-मेल
कर्शयन्तः शरीरस्थं भूतग्राममचेतसः ।
मां चैवान्तःशरीरस्थं तान्विद्ध्यासुरनिश्चयान् ॥ ६ ॥

जो अविवेकि मनुष्य इन्द्रियों सहित अन्तःकरण में स्थित मुझ परमात्मा को कृश करनेवाले हैं उन अज्ञानियों को तू आसूर स्वभाववाले जान ।

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